अपना सपना साफ रिस्पना,
हे मन में विश्वास रिस्पना,
कर देंगे हम साफ रिस्पना,
सबको लेकर साथ रिस्पना,
अपना सपना साफ रिस्पना
अपना सपना साफ रिस्पना ।

ऋषि द्रौण का जाप रिस्पना
सुंदर पवित्र थी आप रिस्पना
अब ढोती सबके पाप रिस्पना
ये कैसा अभिशाप रिस्पना
कर देंगे तुझे साफ रिस्पना
अपना सपना साफ रिस्पना
अपना सपना साफ रिस्पना ।

बांज, बुरांश की अवतार रिस्पना,
कल-कल बहती धार रिस्पना,
मौसी, शिखर झार रिस्पना,
दून की जीवनधार रिस्पना,
करते ही बस्ती पार रिस्पना,
हो जाती लाचार रिस्पना,
ये कैसा सत्कार रिस्पना,
कर देंगे तुझे साफ रिस्पना,
सबको लेकर साथ रिस्पना,
अपना सपना साफ रिस्पना,
अपना सपना साफ रिस्पना।

बहती थी पूरे साल रिस्पना,
अब हो गयी बेहाल रिस्पना,
रुक गयी तेरी चाल रिस्पना,
प्रदूषण का जंजाल रिस्पना,
क्या कर दिया तेरा हाल रिस्पना,
अब अपना सपना साफ रिस्पना,
अपना सपना साफ रिस्पना ।

लेकर तेरा भार रिस्पना,
ना मानेगें अब हार रिस्पना,
कर तेरा शृंगार रिस्पना,
फिर बहेगी जलधार रिस्पना,
पूरे महीने बार रिस्पना,
अब जो जाग चुकी है सरकार रिस्पना,
लेकर सबको साथ रिस्पना,
अपना सपना साफ रिस्पना,
अपना सपना साफ रिस्पना ।

By: Vinod Bagiyal